Tuesday, 24 April 2018

शहीद ऐ आजम सरदार भगत सिंह की जेल डायरी पृष्ठ 57

#शहीद_ऐ_आजम_सरदार_भगत_सिंह_की_जेल_डायरी #पृष्ठ_57
      क्रातिं तो विपदा को ही जन्म देती है , लेकिन ब्रिटिश जनतंत्र ने तो साम्राज्यवादी युद्ध को जन्म दे दिया...... जिसकी बर्बादी की तुलना क्रांति की विपदाओं से तो निश्चित तौर पर तनिक भी नहीं की जा सकती । फिर भी, इस क्रांति ने जारशाही , कुलीनतंत्र और बुर्जुआ वर्ग को उखाड़ फेंका, चर्च को हिलाकर रख दिया, 13 करोड़ लोगों के एक राष्ट्र या राष्ट्रों के एक समूचे कुल में, एक नए जीवन का संचार किया , उसके सामने यह घोषणा करने के लिए की - क्रांति एक विपदा के सिवाय और कुछ नहीं है - ऐसे ही बहरे कानों और निर्लज्ज चेहरों की जरूरत है।
                                      (पृष्ठ 64)¹
#शांतिपूर्ण?
             कब और कहां सत्ताधारी वर्ग ने  शांतिपूर्ण मतदान के जरिए कभी सत्ता और संपत्ति सौंपी है-  और वह भी , खासतौर से ब्रिटिश बुर्जुआ वर्ग ने, जो सदियों से दुनिया भर में लूटपाट करता आया है।
                                     (पृष्ठ 66)²
#समाजवाद_का_लक्ष्य:#शांति
        यह एकदम निर्विवाद सच्चाई है कि समाजवाद का लक्ष्य, सर्वप्रथम रूप से, ताकत के सबसे भौडें और खूनी रूपों को खत्म करना है, और फिर उसके बाद उसके और छिपे रूपों को भी खत्म करना है।
                                       (पृष्ठ 80)
#विश्व_क्रांति_का_लक्ष्य
1.पूंजीवाद को उखाड़ फेंकना ।
2.मानवता की सेवा के लिए पृकति का नियंत्रण करना। बुखारिन ने इसे ही परिभाषित किया।
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¹= व्येहर इज ब्रिटेन गोइंग?
²=पूर्वोक्त।
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इंकलाब जिंदाबाद = साम्राज्यवाद मुर्दाबाद
वन्दे मातरम्
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हो सकता है कि लिखते समय किसी शब्द, किसी शब्द सूचक को सही ढंग से नहीं लिख पाया हूं तो मै सबसे हाथ जोड़कर माफी चाहता हूं
धन्यवाद
आपका अपना  #हरिसिंह_ददरेवा_अभितेजवादी
9377293519
जय हिंद जय भारत
जय जवान जय किसान
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