Saturday, 5 May 2018

शहीद ऐ आजम सरदार भगत सिंह की जेल डायरी पृष्ठ 63

शहीद ऐ आजम सरदार भगत सिंह की जेल डायरी पृष्ठ संख्या 63

#नेता

     थॉमस कार्लाइल (1795-1881 ब्रिटिश लेखक व निबंधकार )लिखता हैं -कोई भी समय बर्बाद न हुआ होता, यदी कोई महान आदमी मिल जाता जो काफी समझदार और नेक होता, जिस में इतनी समझदारी होती कि वह सही- सही जान लें कि वक्त का तकाजा क्या है; जिसमें इतना पराक्रम होता कि वक़्त के लिहाज से सही पर नेतृत्व कर सकता, तब तो उनकी बदौलत कोई भी समय मुक्ति का समय हो सकता था।

#स्वेच्छाचारिता

      काउत्सकी ने प्रोलितारियत डिक्टेटरशिप शीर्षक से एक पुस्तक लिखी, जिसमें उसने बोल्शेविकों द्वारा बुर्जुआ वर्ग के लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित किए जाने की निंदा कि। इस पर लेनिन ने अपनी प्रोलितारियन रिवोल्यूशन (पृष्ठ 77)मे लिखा
     स्वेच्छाचारिता!  जरा सोचें कि इस से खेद प्रकाश में कमीनेपन के किस निकृष्ट स्तर पर उतर कर बुर्जुआ वर्ग की चापलूसी की गई है और कितना अधिक मूर्खतापूर्ण पांडित्य बघारा गया है। जबकि सदियों से, मजदूरों का दमन करने के लिए, गरीब लोगों के हाथ- पांव बांधे रखने के लिए और जनता के सीधे-सादे और मेहनतकश समुदायों के रास्ते में एक सौ एक अड़ंगे और अड़चनें खड़े करते रहने के लिए, पूरी तरह से बुर्जुआ और उसमें भी पूंजीवादी देशों के प्रतिक्रियावादी विधिवेत्ता ही नियम- विधान बनाते आए हैं, और वे ही विविध संहिताओं और कानूनों पर सैकड़ों ग्रंथ और उनकी व्याख्याएं लिखते आए  हैं- जहां इतना सब किया गया है वहां बुर्जुआ उदारपंथियों और कानूनों पर सैंकड़ों  ग्रंथ और उन की व्याख्याएं लिखते आए हैं - जहां इतना सब किया गया है, वहां बुर्जुआ उदारपंथियों और श्री काउत्सकी को कोई स्वेच्छाचारिता नहीं दिखाई देती! तब तो यह सब कानून -व्यवस्था है ! यह सब इसलिए सोचा और लिखा गया है कि कैसे गरीबों को दबाए रख कर निचोड़ते रहा जाए। हजारों हजार बुर्जुआ वकील और सहकारी अहलकार कानूनों की ऐसी व्याख्या करते रहते हैं कि मजदूर और औसत किसान उनकी कंटिंली तारों की घेराबंदी को कभी न तोड़ सकें। बेशक ,यह कोई स्वेच्छाचारिता नहीं है। बेशक, यह उन गंदे या मुनाफाखोर शोषकों का अधिनायकत्व नहीं है जो जनता का खून पी रहे हैं । ओह, ऐसा कुछ भी नहीं है! यह तो शुद्ध जनतंत्र है, जो दिन-प्रतिदिन शुद्ध होता जा रहा  है।
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इंकलाब जिंदाबाद= साम्राज्यवाद मुर्दाबाद
वंदे मातरम
जय हिंद जय भारत
जय जवान जय किसान
हो सकता है  की लिखते समय किसी शब्द को किसी शब्द सूचक को सही ढंग से नहीं लिख पाया हूं तो मैं सब से हाथ जोड़कर माफी चाहता हूं धन्यवाद आपका अपना
#हरिसिंह_ददरेवा_अभीतेजवादी
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.9377293519

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