Friday, 8 June 2018

शहीद ऐ आजम सरदार भगत सिंह जी जेल डायरी पृष्ठ 102

#शहीद_ए_आजम_सरदार_भगत_सिंह_की_जेल_डायरी
#पृष्ठ_102
#जेल_नोट्स
#मार्क्सवाद_बनाम_समाजवाद
(1908-12)
लेखक व्लादिमिर जी. सिखोविच
पीएच.डी. कोलम्बिया विश्वविद्यालय
वह एक एक करके माकर्स के सारे सिद्दांतों कि आलोचना करते हैं और इन सभी को खारिज करते हैं :
1.मुल्य का सिद्धांत
2.इतिहास कि आर्थिक व्याख्या
3.संपदा का थोड़े से हाथों,  अर्थात पूंजीपतियों के हाथों मे सकेन्द्रण,  मध्यम वर्ग का पूरी तरह ख़ात्मा और सर्वहारा वर्ग की बाढ़।
4.बढ़ती गरीबी का सिद्धांत, जिसकी परिणती के तौर पर।
5.आधुनिक राज्य और सामाजिक व्यवस्था का अपरिहार्य संकट।

वह निष्कर्ष निकलते है कि मार्क्सवाद सिर्फ इन्ही मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित है, और उन्हें एक एक करके खारिज करते हुए, निष्कर्ष के तौर पर कहते हैं कि क्रांति के जल्दी फूट पड़ने की सारी धुंधली आशंकाएं अभी तक निर्मल ही साबित हुई हैं। मध्यम वर्ग घट नहीं, बल्कि बढ़ रहा है। धनी वर्ग संख्या में बढ़ रहा है,तथा उत्पादन और उपभोग कि प्रणाली भी परिस्थितियों के अनुसार बदल रही हैं, अत: मजदुरों कि दशा में सुधार करके किसी भी प्रकार के संघर्ष को टाला जा सकता है। सामाजिक अंशाती का कारण गरीबी नहीं, बल्कि ओधोगिक केन्द्रों पर गरीब वर्गो का सकेन्द्रण है, जिसके नाते वर्ग -चेतना पैदा हो रही हैं। इसीलिए सब चिल्ल - पों है।
(भगत सिंह द्वारा पुस्तक पर दर्ज टिप्पणी।)
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हो सकता है कि लिखते समय किसी शब्द को किसी शब्द सूचक को सही ढंग से नहीं लिख पाया हूं तो मै सबसे हाथ जोड़कर माफी चाहता हूं धन्यवाद आपका अपना हरिसिंह ददरेवा #अभितेजवादी
++++++++++++++++9377293519

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