#शहीदे_आजम_सरदार_भगतसिंह_की_जेल_डायरी
#पृष्ठ_108
#1अनिवार्य_कानून_की_अनुज्ञप्ति -1.सजा,युद्ध आदि
#1अनिवार्य_कानून का अर्थ है कार्रवाई का नियम, जो किसी ऐसी सत्ता द्वारा लोगों पर लागू किया जाता है जो इसका अनुपालन बलपूर्वक करवा लेती है ।
कानून एक आदेश है जो व्यक्ति या व्यक्तियों को एक निश्चित आचरण करने के लिए विवश करता है ।
आस्टिन (जॉन आस्टिन ब्रिटिश दार्शनिक, राजनीतिक,चिंतक 1611-1680)
समाज की प्रत्यक्ष नैतिकता भी अनिवार्य कानूनों के दायरे में आती है
#हॉब्स_का_दृष्टिकोण
मनुष्य और हथियार ही कानूनों की शक्ति और संबल है।
हॅाब्स (थामस हाॅब्स 1588-1689 अंग्रेज दार्शनिक- राजनीतिक चिंतक । राज्य की उत्पत्ति के सामाजिक समझौते के सिद्धांत का जनक। राजतंत्रात्मक निरंकुशता का समर्थक था। लेवियाथन 1651 उसकी प्रसिद्ध कृति हैं।)
#2भौतिक_कानून चल रही कार्रवाइयों की अभिव्यक्ति है।( नैतिक कानून या विवेक का कानून कार्रवाइयों की इस रूप में अभिव्यक्ति है ,जैसी वे होनी चाहिए)
#3प्राकृतिक_या_नैतिक_कानून का अर्थ है प्राकृतिक रूप से सही या गलत के सिद्धांत - यानी सभी सही कार्यवाहियों समेत प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत।
न्याय के दो प्रकार - प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष
प्राकृतिक न्याय वह न्याय है जो वास्तव में और सचमुच हो।
प्रत्यक्ष न्याय, न्याय का वह रूप है जिस रूप में उसे समझा जाता है, स्वीकार किया जाता है, और अभिव्यक्ति किया जाता है।
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हो सकता है कि लिखते समय किसी शब्द को किसी शब्द सूचक को सही ढंग से नहीं लिख पाया हूं तो मै सबसे हाथ जोड़कर माफी चाहता हूं धन्यवाद आपका अपना
हरिसिंह ददरेवा अभितेजवादी9377293519
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#1अनिवार्य_कानून_की_अनुज्ञप्ति -1.सजा,युद्ध आदि
#1अनिवार्य_कानून का अर्थ है कार्रवाई का नियम, जो किसी ऐसी सत्ता द्वारा लोगों पर लागू किया जाता है जो इसका अनुपालन बलपूर्वक करवा लेती है ।
कानून एक आदेश है जो व्यक्ति या व्यक्तियों को एक निश्चित आचरण करने के लिए विवश करता है ।
आस्टिन (जॉन आस्टिन ब्रिटिश दार्शनिक, राजनीतिक,चिंतक 1611-1680)
समाज की प्रत्यक्ष नैतिकता भी अनिवार्य कानूनों के दायरे में आती है
#हॉब्स_का_दृष्टिकोण
मनुष्य और हथियार ही कानूनों की शक्ति और संबल है।
हॅाब्स (थामस हाॅब्स 1588-1689 अंग्रेज दार्शनिक- राजनीतिक चिंतक । राज्य की उत्पत्ति के सामाजिक समझौते के सिद्धांत का जनक। राजतंत्रात्मक निरंकुशता का समर्थक था। लेवियाथन 1651 उसकी प्रसिद्ध कृति हैं।)
#2भौतिक_कानून चल रही कार्रवाइयों की अभिव्यक्ति है।( नैतिक कानून या विवेक का कानून कार्रवाइयों की इस रूप में अभिव्यक्ति है ,जैसी वे होनी चाहिए)
#3प्राकृतिक_या_नैतिक_कानून का अर्थ है प्राकृतिक रूप से सही या गलत के सिद्धांत - यानी सभी सही कार्यवाहियों समेत प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत।
न्याय के दो प्रकार - प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष
प्राकृतिक न्याय वह न्याय है जो वास्तव में और सचमुच हो।
प्रत्यक्ष न्याय, न्याय का वह रूप है जिस रूप में उसे समझा जाता है, स्वीकार किया जाता है, और अभिव्यक्ति किया जाता है।
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हो सकता है कि लिखते समय किसी शब्द को किसी शब्द सूचक को सही ढंग से नहीं लिख पाया हूं तो मै सबसे हाथ जोड़कर माफी चाहता हूं धन्यवाद आपका अपना
हरिसिंह ददरेवा अभितेजवादी9377293519
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