#शहीद_ए_आजम_सरदार_भगत_सिंह_की_जेल_डायरी #पृष्ठ_61
#अधिनायकत्व
अधिनायकत्व एक सत्ता है जो सीधे ताकत पर आधारित होती है, और किसी कानून से नहीं बंधी होती। सर्वहारा वर्ग का क्रांतिकारी अधिनायकत्व एक ऐसी सत्ता है जो बुर्जुआ वर्ग के विरुद्ध और उसके ऊपर, सर्वहारा वर्ग द्वारा ताकत के बदौलत लागू की जाती है और जो किसी कानून से नहीं बंधी होती।
-प्रोलि. रिवो(लेनिन कि रचना, सर्वहारा क्रांति और गद्दार काउत्सकी से।) (पृष्ठ 18)-लेनिन
#क्रांतिकारी_अधिनायकत्व
क्रांति एक कार्यवाही है जिसके तहत आबादी का एक तबका दूसरे तबको पर राइफलों, संगीनों, बंदूकों और ऐसे ही अन्य अत्यंत सत्तावादी उपायों के जरिए, अपनी इच्छा आरोपित करता है।और जो पक्ष विजयी होता है वह अपना शासन आवश्यक रूप से, उस भय के जरिए स्थापित करता है, जिसे उसके हथियार प्रतिक्रियावादियों में उत्पन्न करते है। यदि पेरिस के कम्यून ने बुर्जुआ वर्ग के खिलाफ हथियारबंद जनता पर भरोसा नहीं किया होता, तो वह अपने चौबीस घंटे से भी अधिक कायम रख सका होता? इसके विपरीत, क्या हमारी यह आलोचना जायज नहीं है कि कम्यून ने इस सत्ता को बहुत ही कम इस्तेमाल किया है? -एफ. एंगेल्स ( फ्रेडरिक एंगेंलस 1820-1895 कि रचना के बारे मे)
#बुर्जुआ_जनतंत्र
बुर्जुआ जनतंत्र, सामंतवाद कि तुलना में, एक महान ऐतिहासिक प्रगति होने के, बावजूद, एक बहुत ही सीमित, बहुत ही पाखंडपूर्ण संस्था, धनिकों के लिए एक स्वर्ग और शोषित एवं गरीबों के लिए एक जाल और छलावे के अलावा न तो कुछ है और न ही हो सकता है।
-लेनिन (सर्वहारा क्रांति और गद्दार का उत्स्की से)।
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हो सकता है कि लिखते समय किसी शब्द को,किसी शब्द सूचक को सही ढंग से नहीं लिख पाया हूं, तो मैं सब से हाथ जोड़कर माफी चाहता हूं ।
आपका अपना #हरिसिंह_ददरेवा_अभितेजवादी
9377293519
धन्यवाद
#इंकलाब_जिंदाबाद= #साम्राज्यवाद_मुर्दाबाद
#वंन्दे_मातरम्
#जय_जवान_जय_किसान
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#अधिनायकत्व
अधिनायकत्व एक सत्ता है जो सीधे ताकत पर आधारित होती है, और किसी कानून से नहीं बंधी होती। सर्वहारा वर्ग का क्रांतिकारी अधिनायकत्व एक ऐसी सत्ता है जो बुर्जुआ वर्ग के विरुद्ध और उसके ऊपर, सर्वहारा वर्ग द्वारा ताकत के बदौलत लागू की जाती है और जो किसी कानून से नहीं बंधी होती।
-प्रोलि. रिवो(लेनिन कि रचना, सर्वहारा क्रांति और गद्दार काउत्सकी से।) (पृष्ठ 18)-लेनिन
#क्रांतिकारी_अधिनायकत्व
क्रांति एक कार्यवाही है जिसके तहत आबादी का एक तबका दूसरे तबको पर राइफलों, संगीनों, बंदूकों और ऐसे ही अन्य अत्यंत सत्तावादी उपायों के जरिए, अपनी इच्छा आरोपित करता है।और जो पक्ष विजयी होता है वह अपना शासन आवश्यक रूप से, उस भय के जरिए स्थापित करता है, जिसे उसके हथियार प्रतिक्रियावादियों में उत्पन्न करते है। यदि पेरिस के कम्यून ने बुर्जुआ वर्ग के खिलाफ हथियारबंद जनता पर भरोसा नहीं किया होता, तो वह अपने चौबीस घंटे से भी अधिक कायम रख सका होता? इसके विपरीत, क्या हमारी यह आलोचना जायज नहीं है कि कम्यून ने इस सत्ता को बहुत ही कम इस्तेमाल किया है? -एफ. एंगेल्स ( फ्रेडरिक एंगेंलस 1820-1895 कि रचना के बारे मे)
#बुर्जुआ_जनतंत्र
बुर्जुआ जनतंत्र, सामंतवाद कि तुलना में, एक महान ऐतिहासिक प्रगति होने के, बावजूद, एक बहुत ही सीमित, बहुत ही पाखंडपूर्ण संस्था, धनिकों के लिए एक स्वर्ग और शोषित एवं गरीबों के लिए एक जाल और छलावे के अलावा न तो कुछ है और न ही हो सकता है।
-लेनिन (सर्वहारा क्रांति और गद्दार का उत्स्की से)।
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हो सकता है कि लिखते समय किसी शब्द को,किसी शब्द सूचक को सही ढंग से नहीं लिख पाया हूं, तो मैं सब से हाथ जोड़कर माफी चाहता हूं ।
आपका अपना #हरिसिंह_ददरेवा_अभितेजवादी
9377293519
धन्यवाद
#इंकलाब_जिंदाबाद= #साम्राज्यवाद_मुर्दाबाद
#वंन्दे_मातरम्
#जय_जवान_जय_किसान
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