Thursday, 10 May 2018

शहीद ऐ आजम सरदार भगत सिंह जी जेल डायरी पृष्ठ 64

#शहीदे_आजम_सरदार_भगत_सिंह_की_जेल_डायरी
#पृष्ठ_संख्या_64
       लेकिन जब, साम्राज्यवादी युद्ध द्वारा सरहद पार के अपने भाइयों से अलग कर दिए गए मेहनतकश और शोषित जनसमुदायों  इतिहास में पहली बार अपने सोवियतें गठित  कर ली है,  जब उन्होंने राजनीतिक निर्माण के लिए मजदूरों का और उन वर्गों का आह्वान किया है जिन्हें बुर्जुआ वर्ग उत्पीड़ित और जड़ बनाए रखता था और जब से  वे एक नया सर्वहारा राज्य निर्मित करने के काम में लग गए हैं, तथा विकट रुप से जारी युद्ध के दौरान, गृह - युद्ध की ज्वाला में, जब वे शोषकों से  रहित राज्य के बुनियादी सिद्धांत निरूपित करने लगे, तब बुर्जुआ वर्ग के सभी पाजी तत्व और खून चूसने वाले सभी गिरोह काउत्स्की के सुर में सुर मिलाकर, स्वेच्छाचारिता की चीख पुकार मच आने लगे हैं।
      -लेनिन (पृष्ठ 77-78<सर्वहारा क्रांति और गद्दार काउत्स्की> )
#पार्टी
     लेकीन यह सपष्ट हो चुका है कि जब तक क्रांति का नेतृत्व करने के लिए एक सक्षम पार्टी न हो, तब तक कोई क्रांति संभव नहीं हो सकती।
    (पृष्ठ 15, लेसन्स आॉफ अक्टूबर 1917<लिओन त्रात्सकी कि किताब से)
सर्वहारा, क्रांति के लिए पार्टी एक अपरिहार्य उपकरण है।
  (पृष्ठ 15, लेसन्स आॉफ अक्टूबर 1917<लिओन त्रात्सकी कि किताब से)
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इंकलाब जिंदाबाद =साम्राज्यवाद मुर्दाबाद
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हो सकता है कि लिखते समय किसी शब्द, किसी शब्द सूचक को सही ढंग से नहीं लिख पाया हूं तो मै सबसे हाथ जोड़कर माफी चाहता हूं धन्यवाद आपका अपना
#हरिसिंह_ददरेवा_अभितेजवादी
.9377293519
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