इश्क करते जवानी में सभी पर उसका इश्क निराला था
आज़ादी का दीवाना था वो महावीर सिंह मतवाला था
सोलह सितंबर उन्नीस सौ चार एक वीर का जन्म हुआ
सारदादेवी देवीसिंह राठौर के घर उसका आगमन हुआ
गांव साहपुर कुंवर देवीसिंह के घर में जन्मा एक लाल
सारा का सारा कुनबा ख़ुशी मनाए उड़ाए रंग गुलाल
अंग्रेजो की जालिम हुकूमत के जब देखे उन्होंने सीतम
गांधी जी के आंदोलनों से भी अब उठ गया उनका मन
जैसे जैसे बड़े हुए महावीर सिंह समझ गए ये बात
ये गोर ऐसे तो जाने वाले नहीं इनको मरो लात
विद्यालय में तो उनके बड़े ही अज़ब गजब रंग थे
सवालो की ऐसी गहराईयों से अध्यापक भी दंग थे
आगे की शिक्षा पाने की खातिर डी ए वि में पढ़े
आज़ादी की लड़ाई में वो एक सीढ़ी थे और चढ़े
रोबीली जिसकी शान थी वो बड़ी बड़ी मुछो वाला
भीम सी देह थी उसकी वो वज्र सी छाती वाला
काँलेज में उनको क्रांतिकारियों की फौज मिली
जैसे प्यासे को पानी भूखे को दावत भोज मिली
एचएसआरऐ में जुड़े जो क्रांतिकारियों की टोली थी
आज़ादी की खातिर जिस दल खेली खून की होली थी
जीवन अपना वार गए वो देश की आज़ादी बचाने को
देश ऋणी हैं उनका ना सोच पाएगा कर्ज चुकाने को
आज़ादी के दीवानों ने अपना लोहा इस कदर मनवाया
काकोरी,सॉन्डर्स,बमकाण्ड,न जाने क्या क्या कर दिखाया
गौरे इनसे ऐसे डरते की कोई नाम ले ले तो थर्राते थे
हिंदुस्तान की अवाम के दिल में ये राजा की तरह रहते थे
अस्फाक,बिस्मिल,रोशन,राजेंद्र,भगत,राजगुरु,सुखदेव,
गया प्रसाद,दुर्गा,भगवती,शिववर्मा,जतिन दास,जयदेव,
विजयकुमार,कमलनाथ,किशोरी,जिनका कोई सानी नहीं
ऐसे साथी हो जिसके भी उस जैसा किसी का भाग्य नहीं
फांसी पर झूले कई तो कई ताउम्र जैल में कैद रहे
गौरे भरकस प्रयास करें पर कोई भी उफ़ तक ना कहे
भूख हड़ताल करी ऐसी जो आज भी गौरव पाती हैं
हर सितम सहा पर झुके नहीं वाह क्या छाती हैं
सितम देख साथियों पर गौरों के आग दिल में भरदी
अंदमान की जैल में फिर उन्होंने भूख हड़ताल करदी
कई दिनों तक अंग्रेजो ने हर सितम आजमाया था
पर महावीर सिंह ने एक दाना तक भी न खाया था
एक दिन आठ दस गौरो ने महावीर सिंह को बांध लिया
नली डाली नाक में और पेट में दूध भरना सुरु किया
अरे वो शेर कैसे माने वो भी तो बड़ा बलकारी था
एक अकेला बंधा हुआ वो दस दस पर भी भारी था
जबरदस्ती करने से दूध सारा फेफड़ों में उतर गया
आज़ादी का दीवाना वो सबको छोड़ कर चला गया
शहीद हुआ पर उसकी सहादत ने अंग्रेजो को हिला दिया
घबरा करके हुकूमत ने देह को सागर में मिला दिया
धरती अम्बर भी रोये होंगे जब ये मंजर हुआ होगा
महावीर जब समाया तो सागर भी गौरव से रोया होगा
सत्रह मई उन्नीस सौ तेंतीस को वो हमको छोड़ गया
और आवाम को वो देश की आज़ादी की तरफ मोड़ गया
आज़ादी की बलिवेदी पर वो बड़े शान से शहीद हुआ
हरिसिंह ददरेवा प्रणाम करता मैं तो तेरा मुरीद हुआ
मैं तो भाग्यशाली हूँ की हिंदुस्तान में जन्म मिला
शहीदों के परिजनों के साथ रहने का भी नशीब मिला
महावीर सिंह के परिजनों का आश्रीवाद सदा ही चाहूंगा
पोते श्री अशीम जी के साथ आवाज बुलंद करता जाऊंगा
ऐ भारत के वीर लाडले सदा गुणगान तेरा ही गाऊंगा
गर भूले से भी कोई भूल हो तो माफ़ी मैं सबसे चाहूंगा
इश्क करते जवानी में सभी पर उसका इश्क निराला
आज़ादी का दीवाना था वो महावीर सिंह मतवाला
हरिसिंह ददरेवा अभितेजवादी की क्रन्तिकारी श्री महावीर सिंह जी को
भेंट स्वरूप एक रचना अगर किसी भी प्रकार की भूल हो तो माफ़ी चाहूंगा
अभीतेज मेमोरीयल फाउन्डेशन
अखिल भारतीय किसान सभा तारानगर
भारत कि जनवादी नौजवान सभा तारानगर
शहीद ऐ आजम सरदार भगत सिंह संघर्ष समिति ददरेवा
एलान ऐ इंकलाब
शहीद ए आज़म भगत सिंह एक्शन कमिटी
आज़ादी का दीवाना था वो महावीर सिंह मतवाला था
सोलह सितंबर उन्नीस सौ चार एक वीर का जन्म हुआ
सारदादेवी देवीसिंह राठौर के घर उसका आगमन हुआ
गांव साहपुर कुंवर देवीसिंह के घर में जन्मा एक लाल
सारा का सारा कुनबा ख़ुशी मनाए उड़ाए रंग गुलाल
अंग्रेजो की जालिम हुकूमत के जब देखे उन्होंने सीतम
गांधी जी के आंदोलनों से भी अब उठ गया उनका मन
जैसे जैसे बड़े हुए महावीर सिंह समझ गए ये बात
ये गोर ऐसे तो जाने वाले नहीं इनको मरो लात
विद्यालय में तो उनके बड़े ही अज़ब गजब रंग थे
सवालो की ऐसी गहराईयों से अध्यापक भी दंग थे
आगे की शिक्षा पाने की खातिर डी ए वि में पढ़े
आज़ादी की लड़ाई में वो एक सीढ़ी थे और चढ़े
रोबीली जिसकी शान थी वो बड़ी बड़ी मुछो वाला
भीम सी देह थी उसकी वो वज्र सी छाती वाला
काँलेज में उनको क्रांतिकारियों की फौज मिली
जैसे प्यासे को पानी भूखे को दावत भोज मिली
एचएसआरऐ में जुड़े जो क्रांतिकारियों की टोली थी
आज़ादी की खातिर जिस दल खेली खून की होली थी
जीवन अपना वार गए वो देश की आज़ादी बचाने को
देश ऋणी हैं उनका ना सोच पाएगा कर्ज चुकाने को
आज़ादी के दीवानों ने अपना लोहा इस कदर मनवाया
काकोरी,सॉन्डर्स,बमकाण्ड,न जाने क्या क्या कर दिखाया
गौरे इनसे ऐसे डरते की कोई नाम ले ले तो थर्राते थे
हिंदुस्तान की अवाम के दिल में ये राजा की तरह रहते थे
अस्फाक,बिस्मिल,रोशन,राजेंद्र,भगत,राजगुरु,सुखदेव,
गया प्रसाद,दुर्गा,भगवती,शिववर्मा,जतिन दास,जयदेव,
विजयकुमार,कमलनाथ,किशोरी,जिनका कोई सानी नहीं
ऐसे साथी हो जिसके भी उस जैसा किसी का भाग्य नहीं
फांसी पर झूले कई तो कई ताउम्र जैल में कैद रहे
गौरे भरकस प्रयास करें पर कोई भी उफ़ तक ना कहे
भूख हड़ताल करी ऐसी जो आज भी गौरव पाती हैं
हर सितम सहा पर झुके नहीं वाह क्या छाती हैं
सितम देख साथियों पर गौरों के आग दिल में भरदी
अंदमान की जैल में फिर उन्होंने भूख हड़ताल करदी
कई दिनों तक अंग्रेजो ने हर सितम आजमाया था
पर महावीर सिंह ने एक दाना तक भी न खाया था
एक दिन आठ दस गौरो ने महावीर सिंह को बांध लिया
नली डाली नाक में और पेट में दूध भरना सुरु किया
अरे वो शेर कैसे माने वो भी तो बड़ा बलकारी था
एक अकेला बंधा हुआ वो दस दस पर भी भारी था
जबरदस्ती करने से दूध सारा फेफड़ों में उतर गया
आज़ादी का दीवाना वो सबको छोड़ कर चला गया
शहीद हुआ पर उसकी सहादत ने अंग्रेजो को हिला दिया
घबरा करके हुकूमत ने देह को सागर में मिला दिया
धरती अम्बर भी रोये होंगे जब ये मंजर हुआ होगा
महावीर जब समाया तो सागर भी गौरव से रोया होगा
सत्रह मई उन्नीस सौ तेंतीस को वो हमको छोड़ गया
और आवाम को वो देश की आज़ादी की तरफ मोड़ गया
आज़ादी की बलिवेदी पर वो बड़े शान से शहीद हुआ
हरिसिंह ददरेवा प्रणाम करता मैं तो तेरा मुरीद हुआ
मैं तो भाग्यशाली हूँ की हिंदुस्तान में जन्म मिला
शहीदों के परिजनों के साथ रहने का भी नशीब मिला
महावीर सिंह के परिजनों का आश्रीवाद सदा ही चाहूंगा
पोते श्री अशीम जी के साथ आवाज बुलंद करता जाऊंगा
ऐ भारत के वीर लाडले सदा गुणगान तेरा ही गाऊंगा
गर भूले से भी कोई भूल हो तो माफ़ी मैं सबसे चाहूंगा
इश्क करते जवानी में सभी पर उसका इश्क निराला
आज़ादी का दीवाना था वो महावीर सिंह मतवाला
हरिसिंह ददरेवा अभितेजवादी की क्रन्तिकारी श्री महावीर सिंह जी को
भेंट स्वरूप एक रचना अगर किसी भी प्रकार की भूल हो तो माफ़ी चाहूंगा
अभीतेज मेमोरीयल फाउन्डेशन
अखिल भारतीय किसान सभा तारानगर
भारत कि जनवादी नौजवान सभा तारानगर
शहीद ऐ आजम सरदार भगत सिंह संघर्ष समिति ददरेवा
एलान ऐ इंकलाब
शहीद ए आज़म भगत सिंह एक्शन कमिटी
No comments:
Post a Comment