Saturday, 19 May 2018

शहीद ऐ आजम सरदार भगत सिंह की जेल डायरी पृष्ठ 72

#शहीद_ऐ_आजम_सरदार_भगत_सिंह_की_जेल_डायरी_

#पृष्ठ_72
      अब जरूरत किस बात की है कि हम अपने आपको पुराने फार्मुलों से नहीं, बल्कि नयी वास्विकताओं से निर्देशित करें। ¹

    वह हमेशा ही भविष्य के लिए अतीत से लड़ते रहे। ²

            ......लेकिन एक क्षण ऐसा आता है जब सोचने कि यह आदत, कि दुश्मन अधिक बलवान है, विजय के लिए मुख्यबाधा बन जाती हैं। ³
      ......लेकिन ऐसी परिस्थितियों में हरेक पार्टी के पास अपना लेनिन तो होगा नहीं।
......महत्वपूर्ण क्षण को गवां देने का क्या मतलब होता है?.......
रणकौशल कि सारी कला इसी में है, कि जब परिस्थितियों का संयोग सर्वाधिक अनुकूल हो तो उन क्षणों के अनुरुप कार्रवाई की जाए...।
   परिस्थितियों ने ऐसा ही संयोग उपस्थित किया था और लेनिन ने कहा था कि संकट को किसी न किसी पक्ष में हल करना जरूरी है। लेनिन ने बार - बार कहा, अभी या कभी नहीं। 4
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1=त्रात्स्की कि किताब लेसन्स आॅफ अक्टूबर 1917 से (पृष्ठ 25)
2=पुर्वोक्त (पृष्ठ 41)
3= पूर्वोक्त ( पृष्ठ 48)
4= पूर्वोक्त (पृष्ठ 52)
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हो सकता है कि लिखते समय किसी शब्द, किसी शब्द सूचक को सही ढंग से नहीं लिख पाया हूं तो मै सबसे हाथ जोड़कर माफी चाहता हूं धन्यवाद आपका अपना
#हरिसिंह_ददरेवा_अभितेजवादी9377293519
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इंकलाब जिंदाबाद साम्राज्यवाद मुर्दाबाद
वन्दे मातरम्
जय हिंद जय भारत
जय जवान जय किसान
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