Thursday, 10 May 2018

क्रांती सम्राट डॉ गया प्रसाद कटियार


** क्रांति सम्राट डॉ. गया प्रसाद कटियार **
प्रणाम करता हूँ मैं डॉ गया प्रसाद जी को
हिंदुस्तान के लाडले उस क्रांति सम्राट को
.
छोटी सी उम्र में ही देश प्रेम का भाव जगा
असहयोग आंदोलन में गांधी जी के साथ लगा
.
आंदोलन देख सोच रही थी अब सारी दुनिया होगा
 आज़ाद भारत झुकेगी हुकूमत ब्रितानिया पर
.
 चोरी चौरा काण्ड में गांधी जी गए रूठ
आज़ादी का सपना वो अब गया लगभग टूट
.
पर आज़ादी के दीवाने कब किसकी सुनते थे
जो लगता था उनको सही राह वही वे चुनते थे
.
कुछ इस कदर समाये थे वे गौरों के दिल में
पसीने में नहाते गोरे नाम लेले गर कोई भूल में
.
आज़ादी का दीवाना था उसके साथी भी दीवाने थे
राजेंद्र, अश्फाक, रोशन, बिस्मिल, बड़े सयाने थे
.
जतिन, महावीर, सुखदेव, राजगुरु, ऐसे सच्चे यार
शिव वर्मा, चन्द्र शेखर, भगत सिंह से सरदार
.
इन नोजवानो ने आवाम के दिल पर राज किया
आज़ादी की खातिर शस्त्र क्रांति का राह लिया
.
भेष बदलने में माहिर थे पकड़ना बड़ा मुश्किल था
डॉ साहब के घर में लगता क्रांति शिविर था
.
कमाई अपनी सारी वे संघठन में लगाते रहते  थे
गोला बारूद और  हथियारों से तैयारी कराते थे 
.
शस्त्र क्रांति के लिए जरुरी था कुंवारा होना
पर गया प्रसाद का बचपन में ही हो गया था गौना
.
अब क्या होगा सबके मन में उहापोह चले
पर गया प्रसाद तो अपने चुने रस्ते पर चले
.
परिवारों को जमा किया रज्जो देवी बिठाली सामने
सब सोचे क्यों बुलाया हैं क्या चाहता हैं  कहने 
.
उन्होंने बात जो बोली वो किसी ने न सोची होगी
रज्जो देवी के दिल पर न जाने क्या बीती होगी
.
गया प्रसाद बोले रज्जो तुम विधवा हो जाओ
देश के लिए लड़ना मुझे तुम अब अलग हो जाओ
.
सब सोच रहे न जाने रज्जो अब क्या बोलेगी
होगा क्या जब ये अपने बंद जुबान खोलेगी
.
वो बोली आगे बढ़ो मत सोचो मैं तुम्हारे साथ नहीं
लडू मैं भी देश के लिए क्या ये मेरा अधिकार नहीं
.
सब देखते रह गए रज्जो देवी और गया प्रसाद को
ऊँचा कर दिया तुमने देश में कटियार समाज को
.
इंकलाब का दौर हुआ क्रांति की भड़क उठी ज्वाला
लड़ा लड़ाई आज़ादी की वो बड़े ईमान से मतवाला
,
सॉन्डर्स हत्या और संसद बम काण्ड से अंग्रेज हिले
क्रांति हुयी ऐसी की देल्ही से लन्दन तक दहले
.
गिरफ्तारियां होने लगी फाँसियों का दौर चला
किसी को काला पानी किसी को जेल लाहोर मिला
.
रज्जो देवी ने भी क्या खूब साथ निभाया था
भूख हड़ताल के वक्त एक निवाला भी न खाया था
,
हो गई वो भी शहीद और देश के काम वो आई
करते हैं प्रणाम नमन तुमको हम रज्जो माई
.
गया प्रसाद के लगभग साथी अब शहीद हुए
और बचे देश की आज़ादी तक जैलो में कैद रहे
.
सत्रह साल तक जेल में रहे गोरों से डटके लड़े
हैं प्रणाम गया प्रसाद तुमसे लाल अब कहाँ बने
.
आज़ादी के बाद में हक की आवाज उठाने पर
जेल में मेहमान बने फिर से दो साल तक
.
फिर आज़ाद हुआ आज़ादी का दीवाना सान से
निर्मला देवी संग विवाह किया जिया जीवन मान से
.
गया प्रसाद के बेटे क्रांति कुमार से आशीर्वाद पाकर
लिखा छोटा सा किस्सा टूटे फूटे शब्द मिलाकर
,
कितना भी गुणगान कर लो फिर भी कम रह जायेगा
ऎ भारत के वीर लाडले क्या फिर से वापस आएगा
.
एक बार फिर जन्म लेले और साथ ला अपने वे साथी
देश की हालत बिगड़े उससे पहले दिला सच्ची आज़ादी
.
कहता हैं हरिसिंह ददरेवा मुझको हैं बड़ा नसीब मिला 
शहीदों के परिजनों का मुझको हैं सदैव आशीर्वाद मिला

.*****"*"******"""
प्रस्तुति ~~~  हरिसिंह ददरेवा

No comments:

Post a Comment