#शहीद_ऐ_आजम_सरदार_भगत_सिंह_की_जेल_डायरी
#पृष्ट_70
#कार्ल_मार्क्स_की_गलतियां_निकालना
......और यह निश्चित मालूम पड़ता है कि त्रोत्सकी मानो उससे संबंधित थे जिसे जर्मन असली राजनीति का स्कूल कहा करते थे और किसी भी विचारधारा के प्रति एकदम उतना ही मासूम थे जितना कि बिस्मार्क । और इसीलिए, यह देखकर कुतूहल होता है कि त्रात्स्की भी इतने क्रान्तिकारी नहीं हैं कि कह सके कि मार्क्स ने एक गलती की थी ; बल्कि वह एक या अधिक पृष्ठ अर्थनिरूपण के काम में - अर्थात यह सिद्ध करने में लगाना जरूरी समझते हैं कि पवित्र पुस्तकों में जो कुछ कहा गया है, उसका अर्थ एकदम भिन्न है ।
(त्रात्स्की कृत लेंस ऑफ अक्टूबर 1917 की भूमिका ए.सूसन लारेंस द्वारा लिखित भूमिका(1925 में पहली बार प्रकाशित )
#जनता_की_आवाज
हमें जितनी सरकारों के बारे में जानकारी है,वह सबकी सब मुख्य रूप से, जनता के प्रति उदासीन रहकर ही शासन करती रही है, वे हमेशा ही देश के राजनीतिक रूप से सचेत इस या उस तबके कि, अल्पसंख्यक सरकारें ही रही हैं । लेकिन जब यह दैत्य (यानी जनता - सं.) जाग जाएगा जो उसकी मर्जी लागू होगी, लेकिन सबसे बड़ी बात है कि यह समय से जागेगा या नहीं।
(त्रात्स्की कृत लेंस ऑफ अक्टूबर 1917 की भूमिका ए.सूसन लारेंस द्वारा लिखित भूमिका(1925 में पहली बार प्रकाशित )
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हो सकता है कि लिखते समय किसी शब्द को किसी शब्द सूचक को सही ढंग से नहीं लिख पाया हूं तो मैं सबसे हाथ जोड़कर माफी चाहता हूं धन्यवाद आपका अपना हरिसिंह ददरेवा अभीतेजवादी9377293519
इंकलाब जिंदाबाद साम्राज्यवाद मुर्दाबाद
जय हिंद जय भारत
जय जवान जय किसान
वंदे मातरम
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#पृष्ट_70
#कार्ल_मार्क्स_की_गलतियां_निकालना
......और यह निश्चित मालूम पड़ता है कि त्रोत्सकी मानो उससे संबंधित थे जिसे जर्मन असली राजनीति का स्कूल कहा करते थे और किसी भी विचारधारा के प्रति एकदम उतना ही मासूम थे जितना कि बिस्मार्क । और इसीलिए, यह देखकर कुतूहल होता है कि त्रात्स्की भी इतने क्रान्तिकारी नहीं हैं कि कह सके कि मार्क्स ने एक गलती की थी ; बल्कि वह एक या अधिक पृष्ठ अर्थनिरूपण के काम में - अर्थात यह सिद्ध करने में लगाना जरूरी समझते हैं कि पवित्र पुस्तकों में जो कुछ कहा गया है, उसका अर्थ एकदम भिन्न है ।
(त्रात्स्की कृत लेंस ऑफ अक्टूबर 1917 की भूमिका ए.सूसन लारेंस द्वारा लिखित भूमिका(1925 में पहली बार प्रकाशित )
#जनता_की_आवाज
हमें जितनी सरकारों के बारे में जानकारी है,वह सबकी सब मुख्य रूप से, जनता के प्रति उदासीन रहकर ही शासन करती रही है, वे हमेशा ही देश के राजनीतिक रूप से सचेत इस या उस तबके कि, अल्पसंख्यक सरकारें ही रही हैं । लेकिन जब यह दैत्य (यानी जनता - सं.) जाग जाएगा जो उसकी मर्जी लागू होगी, लेकिन सबसे बड़ी बात है कि यह समय से जागेगा या नहीं।
(त्रात्स्की कृत लेंस ऑफ अक्टूबर 1917 की भूमिका ए.सूसन लारेंस द्वारा लिखित भूमिका(1925 में पहली बार प्रकाशित )
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हो सकता है कि लिखते समय किसी शब्द को किसी शब्द सूचक को सही ढंग से नहीं लिख पाया हूं तो मैं सबसे हाथ जोड़कर माफी चाहता हूं धन्यवाद आपका अपना हरिसिंह ददरेवा अभीतेजवादी9377293519
इंकलाब जिंदाबाद साम्राज्यवाद मुर्दाबाद
जय हिंद जय भारत
जय जवान जय किसान
वंदे मातरम
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